Narad Ki Bhavishyavani
(Krishna Ki Atmakatha Vol. I)
(Kindle Edition)

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युद्धस्‍थल में मोहग्रस्‍त एवं भ्रमित अर्जुन से ही मैंने नहीं कहा था कि तुम निमित्त मात्र हो वरन‍् इस पुस्तक के लेखक से भी कहा है कि तुम निमित्त मात्र हो, कर्ता तो मैं हूँ।… अन्यथा तुम आज की आँखों से उस अतीत को कैसे देख सकोगे, जिसे मैंने भोगा? उस संत्रास का कैसे अनुभव करोगे, जिसे मेरे युग ने झेला है? उस मथुरा को कैसे समझ सकोगे, जो मेरे अस्ति‍त्व की रक्षा के लिए नट की डोर के तनाव पर केवल एक पैरे से चली है?... और दुःखी व्रज के उसव प्रेमोन्माद का तुम्हें क्या आभास लगेगा, जो मेरे वियोग में आकाश के जलते चंद्र को आँचल में छिपाकर करील के कुंजों में विरहा‌ग्‍न‌ि बिखेर रहा था?
कृष्‍ण के अनगिनत आयाम हैं। दूसरे उपन्यासों में कृष्‍ण के किसी विशिष्‍ट आयाम को ‌‌ल‌िया गया है। किंतु आठ खंडों में विभक्‍त इस औपन्‍यासिक श्रृंखला ‘कृष्‍ण की आत्मकथा’ में कृष्‍‍ण को उनकी संपूर्णता और समग्रता में उकेरने का सफल प्रयास ‌‌क‌िया गया है। किसी भी भाषा में कृष्‍‍णचरित को लेकर इतने विशाल और प्रशस्‍त कैनवस का प्रयोग नहीं किया है।
यथार्थ कहा जाए तो ‘कृष्‍ण की आत्मकथा’ एक उपनिषदीय कृति है। ‘कृष्‍‍ण की आत्मकथा श्रृंखला के आठों ग्रंथ’
नारद की भविष्‍यवाणी दुरभिसंध‌ि द्वारका की स्‍थापना लाक्षागृह खांडव दाह राजसूय यज्ञ संघर्ष प्रलय

AuthorManu Sharma
BindingKindle Edition
FormatKindle eBook
LanguageHindi
Language TypePublished
Number Of Pages462
Product GroupeBooks
PublisherPrabhat Prakashan
Release Date2018-05-05
StudioPrabhat Prakashan
Sales Rank364

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General information about Narad Ki Bhavishyavani (Krishna Ki Atmakatha Vol. I) (Hindi Edition)