ध्यान-सूत्र – Dhyan Sutra
(Hindi Edition)
(Kindle Edition)

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महाबलेश्वर के प्राकृतिक वातावरण में ओशो द्वारा संचालित ध्यान शिविर के दौरान हुए प्रवचनों व प्रायोगिक ध्यान प्रयोगों का संकलन है यह पुस्तक। शरीर, विचारों और भावों की एक-एक परत से ग्रंथियों को विलीन करने की कला समझाते हुए, ओशो हमें समग्र स्वास्थ्य और संतुलन की ओर लिए चलते हैं।

पुस्तक के कुछ अन्य विषय-बिंदु:

* सेक्स ऊर्जा का सृजनात्मक उपयोग कैसे करें?
* क्रोध क्या है? क्या है उसकी शक्ति?
* अहंकार को किस शक्ति में बदलें?
* वैज्ञानिक युग में अध्यात्म का क्या स्थान है?

अनुक्रम
#1: प्यास और संकल्प
#2: शरीर-शुद्धि ‍के अंतरंग सूत्र
#3: चित्त-शक्तियों का रूपांतरण
#4: विचार-शुद्धि के सूत्र
#5: भाव-शुद्धि की कीमिया
#6: सम्यक रूपांतरण के सूत्र
#7: शुद्धि और शून्यता से समाधि फलित
#8: समाधि है द्वार
#9: आमंत्रण—एक कदम चलने का

उद्धरण: ध्यान-सूत्र,नौवां प्रवचन

"यदि परमात्मा को पाने का खयाल आपके भीतर एक लपट बन गया हो, तो उस खयाल को जल्दी कार्य में लगा देना। जो शुभ को करने में देर करता है, वह चूक जाता है। और जो अशुभ को करने में जल्दी करता है, वह भी चूक जाता है। शुभ को करने में जो देर करता है, वह चूक जाता है। और अशुभ को करने में जो जल्दी करता है, वह चूक जाता है।

जीवन का सूत्र यही है कि अशुभ को करते समय रुक जाओ और देर करो, और शुभ को करते समय देर मत करना और रुक मत जाना।

अगर कोई शुभ विचार खयाल में आ जाए, तो उसे तत्क्षण शुरू कर देना उपयोगी है। क्योंकि कल का कोई भरोसा नहीं है। आने वाले क्षण का कोई भरोसा नहीं है। हम होंगे या नहीं होंगे, नहीं कहा जा सकता। इसके पहले कि मृत्यु हमें पकड़ ले, हमें निर्णायक रूप से यह सिद्ध कर देना है कि हम इस योग्य नहीं थे कि मृत्यु ही हमारा भाग्य हो। इसके पूर्व कि मृत्यु हमें पकड़ ले, हमें यह सिद्ध कर देना है कि हम इस योग्य नहीं थे कि मृत्यु ही हमारा भाग्य हो। मृत्यु से ऊपर का कुछ पाने की क्षमता हमने विकसित की थी, यह मृत्यु के आने तक तय कर लेना है। और वह मृत्यु कभी भी आ सकती है, वह किसी भी क्षण आ सकती है। अभी बोल रहा हूं और इसी क्षण आ सकती है। तो मुझे उसके लिए सदा तैयार होने की जरूरत है। प्रतिक्षण मुझे तैयार होने की जरूरत है।

तो कल पर न टालना।… सबसे बड़ा महत्वपूर्ण बोध मृत्यु का बोध है साधक को। उसे प्रतिक्षण ज्ञात होना चाहिए कि कोई भी क्षण मौत हो सकती है। आज सांझ मैं सोऊंगा, हो सकता है, यह आखिरी सांझ हो और सुबह हम न उठें। तो मुझे आज रात सोते समय इस भांति सोना चाहिए कि मैंने अपने जीवन का सारा हिसाब निपटा लिया है और अब मैं निश्चिंत सो रहा हूं। अगर मौत आएगी, तो उसका स्वागत है।"—ओशो

AuthorOsho .
BindingKindle Edition
EISBN9780880508094
FormatKindle eBook
LanguageHindi
Language TypePublished
Number Of Pages290
Product GroupeBooks
Publication Date2018-03-27
PublisherOSHO Media International
Release Date2018-03-27
StudioOSHO Media International
Sales Rank2042

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General information about ध्यान-सूत्र – Dhyan Sutra (Hindi Edition)