सन्यासी की आत्मा !
(Hindi Edition)
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यह कहानी सच्ची घटना से प्रेरित एक फिक्शन है जो लोगों के हर किसी को भगवान् मान के पूजने की अंधभक्ति के परिणाम को बताती है और बताती है की कैसे इत्तेफाकों के कारण लोग एक सन्यासी स्वरुप को भगवान् बना लेते हैं जिससे खुद सन्यासी की आत्मा परेशान होकर छुटकारा पाना चाहती है पर यह हों नहीं पाता।
यह कहानी है 1994 की, एक छोटे से रेगिस्तानी गाँव की जिसका नाम है हुस्नपुर। हुस्नपुर अकाल से पीड़ित था और वहां यह मान्यता थी की इस संकट से केवल वहां के लोक देवता छोटू जी ही निजात दिला सकते है। छोटू जी हुस्नपुर समेत पुरे रेगिस्तान की हर बार के अकाल में सहयता करते थे परन्तु इस बार वो इस काम में असफल हो जाते हैं जिससे गाँव वालों का उनपर से विश्वास डगमगा जाता है। इसी बीच कुछ शरारती लड़के छोटू जी को साक्षात् देखने का झूठा दावा कर बैठते हैं जिसके फलस्वरूप गाँव की पंचायत में एक मुद्दा उठता है की छोटू जी के पूजा पाठ में हो रही अनियमितताएं उस घोर अकाल एवं भुखमरी का कारण है। अतः छोटू जी खुद लोगों को दिखकर हमें गलतियों का अहसास करना चाहते हैं इसलिए पंचायत ने ऐलान किया की छोटू जी को जमीन पर सामने बुलाया जायेगा, उनसे नाराजगी की माफ़ी मांगने, लेकिन अगर छोटू जी सामने नहीं आ पाते हैं तो उन्हें मानना बंद कर दिया जाएगा और प्राचीन मंदिर पर ताला लगा दिया जाएगा।
गाँव के सबसे इज्जतदार माने जाने वाले काकाजी, लोक-देवता छोटू जी के वंशज थे जिनके पास वो शरारती लोग जाके माफ़ी मांगते हुए हुस्नपुर के निर्णय को बदलवाने की कौशिश करते हैं परन्तु काकाजी उन्हें यह कहते हुए लौटा देते हैं की वो खुद चाहते हैं की लोग छोटू जी को मानना बंद करदे इसलिए वो भी उनको बुलाने जायेंगे, वो भी यह जानते हुए की कोई नहीं आने वाला!
कहानी तब जाकर एक दिलचस्प मोड़ ले लेती है जब छोटू जी खुद उन लड़कों के पास रात को आके बताते हैं की मैं कल गाँव के सामने नहीं आऊंगा क्योंकि मैं भगवान् नहीं सिर्फ एक सन्यासी की आत्मा मात्र हूँ। और रोज-रोज के पूजा पाठ से तंग आ चूका हूँ क्योंकि यह मेरी आत्मा की शांति को भंग करते हैं इसलिए अगर मैं नहीं आया तो लोग मुझे मानना बंद कर देंगे और मुझे शान्ति मिलेगी।
उपरोक्त बातों से लड़कों में डर बैठ जाता है की अगर भगवान् नहीं आये तो लोग समझ जायेंगे की वो झूठ बोल रहे थे और उन्होंने छोटू जी को नहीं देखा जिससे पंचायत में उन्हें सजा भी हो सकती है।
दुसरे दिन पूरा गाँव छोटू जी के मंदिर के आगे पहुँच जाता है उनको बुलाने और इस तरह आगे घटता है इतिहास का एक रोचक वाकया........!

Authorविकास महर्षि
BindingKindle Edition
FormatKindle eBook
LanguageHindi
Language TypePublished
Number Of Pages126
Product GroupeBooks
Publication Date2017-06-29
Release Date2017-06-29
Sales Rank112103

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