महिषासुर
एक जननायक (Mahishasur
(Kindle Edition)

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एक मशहूर अफ्रीकन कहावत है, “जब तक शेरों के अपने इतिहासकार नहीं होंगे, इतिहास शिकारी का ही महिमामंडन करता रहेगा।” पुस्तक, 'महिषासुर : एक जननायक', पिछले लगभग पांच सालों के अंतराल में विभिन्न लेखकों द्वारा दुर्गा-महिषासुर मिथक की भिन्न पाठों पर लेखों का संकलन है। उपरोक्त अफ्रीकी कहावत के संदर्भ में, यह शेरों द्वारा शिकारियों के इतिहास को चुनौती देते हुए वैकल्पिक इतिहास लेखन के शुरुआती दौर की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस बात पर आम सहमति है कि महिषासुर अनार्य, मूलनिवासियों, असुरों का एक लोकप्रिय और जनपक्षीय राजा या गणनेता था जिसे आर्य (सुर) युद्ध में न पराजित कर सके तो एक महिला के इस्तेमाल से छल-कपट से उसे मार दिया। वंचितों को अहसास हो गया है कि जिन शास्त्रों के बल पर ब्राह्मणवाद ने समाज को जाति-व्यवस्था का गुलाम बनाए रखा, उसका विखंडन जरूरी है। मिथकों की नई व्याख्याएं इसी प्रक्रिया की कड़ियां हैं। - ईश मिश्रा, प्राध्यापक (इतिहास), दिल्ली विश्वविद्यालय
- समाकालीन तीसरी दुनिया, हिंदी त्रैमासिक, अक्टूबर-दिसम्बर 2016

पिछले कुछ सालों से महिषासुर के नाम पर एक आंदोलन शुरू हुआ है। इस आंदोलन के कर्ताओं ने महिषासुरमर्दिनी दुर्गा के मिथक का प्रचलित पाठ से इतर एक अन्य पाठ पेश किया है, जिसके अनुसार महिषासुर देवताओं के छल के शिकार हुए और दुर्गा इस छल का माध्यम बनीं। प्रस्तुत पुस्तक महिषासुर के मुद्दे पर उनके पक्षधरों का दृष्टिकोण पेश करती है। - दैनिक हिंदुस्तान, 9 अक्टूबर, 2016

प्रमोद रंजन द्वारा संपादित पुस्तक “महिषासुर एक जननायक” का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि आखिर महिषासुर नाम से शुरू किया गया यह आन्दोलन है क्या? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके निहितार्थ क्या हैं? इस पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि जब असुर एक प्रजाति है तो उसकी हार या उसके नायक की ह्त्या का उत्सव किस सांस्कृतिक मनोवृत्ति का परिचायक है? इतिहास में बहुजन नायकों को पीछे कर दिया गया। बहुजन प्रतीकों को अपमानित किया जा रहा है। हमारे नायकों को छलपूर्वक अंगूठा और सिर काट लेने की प्रथा पर हम सवाल करना चाहते हैं। इन नायकों का अपमान हमारा अपमान है। विभिन्न स्रोतों के अध्ययन से यह स्पष्ट किया गया है कि एक देवी के रूप में दुर्गा वास्तव में मिथकीय चरित्र है¸ ब्राह्मणों की कल्पना मात्र है। जबकि महिषासुर एक वास्तविक चरित्र हैं, जो के प्रतापी, समतावादी जननायक था। - मो. आरिफ खान, युवा आलोचक व समीक्षक, - फारवर्ड प्रेस, मार्च 2017

AuthorPramod Ranjan
BindingKindle Edition
Edition2
FormatKindle eBook
LanguageHindi
Language TypePublished
Number Of Pages182
Product GroupeBooks
Publication Date2017-03-06
PublisherForward Press Books
Release Date2017-03-06
StudioForward Press Books
Sales Rank18998

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